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सोमवार, 19 अक्टूबर 2015

नवरात्रि विशेष : हत्था जोड़ी

नवरात्रि विशेष : हत्था जोड़ी
अगर आपको स्टॉक मार्किट में फैयदा नहीं हो रहा है या मेहनत करने पर भी धन की प्राप्ति नहीं होती काम बिगड़ जाते है ,अगर व्यापार न चल पा रह हो यां जीवन में उन्नति न हो पा रही हो ,कई बार इर्षा के कारण कुछ लोग तंत्र प्रयोग कर देते हैं जिससे दूकान में ग्राहक नहीं आते यां कार्य सफल नहीं होते.
यह हत्था जोड़ी बहुत ही शक्तिशाली व प्रभावकारी तांत्रिक वस्तु है ।मुकदमा ,शत्रु संघर्ष ,दरिद्रता ,व दुर्लभ आदि के निवारण में इसके जैसी चमत्कारी वस्तु आज तक देखने में नही आई इसमें वशीकरण को भी अदुभूत शक्ति है , भूत दृप्रेत आदि का भय नही रहता यदि इसे नवरात्रि / शुभ दिन में तांत्रिक विधि से सिध्द कर दिया जाए तो साधक निष्चित रूप से चामुण्डा देवी का कृपा पात्र हो जाता है यह जिसके पास होती है उसे हर कार्य में सफलता मिलती है धन संपत्ति देने वाली यह बहुत चमत्कारी साबित हुई है तांत्रिक वस्तुओं में यह महत्वपूर्ण है ।
हत्था जोड़ी में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षात चामुंडा देवी का प्रतिरूप है. हत्था जोड़ी से सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा ,शत्रु दमन तथा मुकदमो में विजय हासिल होती है !
तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है.
कभी धन की याचना नहीं करनी पड़ती अपितु धन उसकी और स्वयं ही आकर्षित होता रहता है …और धन-सम्पति, वशीकरण, शत्रु शमन मे व्यक्ति सशक्त हो जाता है l जिस व्यक्ति के पास यह होती है l उसे किसी बात कि कमी नहीं होती l उसकी लगभग सभी इछचाये पूर्ण हो जाती है l

शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

नवरात्रि : किस कन्या के पूजन का क्या मिलेगा फल

नवरात्रि : किस कन्या के पूजन का क्या मिलेगा फल
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हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व माना गया है। खास तौर पर अ‍ष्टमी तथा नवमी तिथि को 3 से 9 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन करने की परंपरा है। यह कन्याएं साक्षात मां दुर्गा का स्वरूप मानी जाती है। जानिए नवरात्रि में इन कन्याओं के पूजन से क्या लाभ प्राप्त होता है :-
* दो वर्ष की कन्या को कौमारी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके पूजन से दुख और दरिद्रता समाप्त हो जाती है।
* तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति मानी जाती है। त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और संपूर्ण परिवार का कल्याण होता है।
* चार वर्ष की कन्या कल्याणी नाम से संबोधित की जाती है। कल्याणी की पूजा से सुख-समृद्धि मिलती है।
* पांच वर्ष की कन्या रोहिणी कही जाती है। रोहिणी की पूजन से व्यक्ति रोग मुक्त होता है।
* छह और सात वर्ष की कन्या चण्डिका के पूजन से ऐश्वर्य मिलता है।
* आठ वर्ष की कन्या शाम्भवी की पूजा से लोकप्रियता प्राप्त होती है।
* नौ वर्ष की कन्या दुर्गा की अर्चना से शत्रु पर विजय मिलती है तथा असाध्य कार्य सिद्ध होते हैं।